माँ ने घर से निकाला फूटपाथ पर रहने को हुआ मजबूर,देश का पहला ट्रांस जेंडर पायलट बन हैरी ने बनाई अपनी पहचान

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माँ ने घर से निकाला फूटपाथ पर रहने को हुआ मजबूर,देश का पहला ट्रांस जेंडर पायलट बन हैरी ने बनाई अपनी पहचान

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कमर्श‍ियल पायलट बनने का सपना पूरा किन्नर ने सबके दिलो में जगाया प्यार और पाया सम्मान 


हैरी के अभिभावक को जब जानकारी लगी की उनका बेटा एक किन्नर है। पहले तो उन्होंने उसे एक रूम में बंद कर दिया। जब उस बच्चे की उम्र करीब 19 साल थी। इस बीच उनके माता पिता द्वारा उनको खूब प्रताड़ित किया गया।शाररिक और मानसिक रूप से वह प्रताड़ित किये गये। उसके बाद उनको घर से निकल दिया और सारे रिश्ते खत्म कर दिए.

दोस्तो मां और बच्चे का रिश्ता बहुत ही प्यारा होता है ।मां अपने बच्चे को एक पल के लिए भी नजर से ओझल नहीं होने देती । मां के लिए अपना हर बच्चा बराबर होता है चाहे वो गोरा हो या काला बिल्कुल फिट हो या डिसेबल ।लेकिन आज हम आपको एक ऐसी मां के बारे में बताने वाले जिसने अपने बच्चे को इस लिए घर से निकाल दिया क्योंकि वो एक ट्रांसजेंडर था ।क्या एक ट्रांसजेंडर होने की वजह से एक मां का अपने बच्चे के लिए प्यार कम हो जाता है ।ऐसे कैसे एक मां का दिल अपने बच्चे के प्रति पत्थर का हो सकता है ।जिस बच्चे को पत्थर दिल मां ने भूखे प्यासे मरने को छोड़ दिया था आज वो बच्चा कहां है और किस हाल में है जानने के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।     

किन्नर                                             

कौन है वह बच्चा

एडम हैरी (Adam Harry), जो केरल (Kerala) राज्य के थ्रि‍सुर (Thrissur) जिले के निवासी है। हैरी के अभिभावक को जब जानकारी लगी की उनका बेटा एक किन्नर है। पहले तो उन्होंने उसे एक रूम में बंद कर दिया। जब उस बच्चे की उम्र करीब 19 साल थी। इस बीच उनके माता पिता द्वारा उनको खूब प्रताड़ित किया गया।शाररिक और मानसिक रूप से वह प्रताड़ित किये गये। उसके बाद उनको घर से निकल दिया और सारे रिश्ते खत्म कर दिए घर से निकालते वक़्त हैरी की किसी ने कोई सहायता नहीं की यहाँ तक की उनके पास पैसे भी नहीं थे। इस वजह से उनको फुटपाथ पर रहना पड़ा। इतने संघर्ष पूर्ण जीवन में भी उनके कदम डगमगाए नहीं, जिनके हौसलों में दम होता है, उन्ही के सपनो में उडान होती है। इस बात को सच साबित करके दिखाया।

क्या थे हैरी के सपने 

हैरी एक कमर्श‍ियल पायलट बनना चाहते थे। परंतु समय की मार से वह थोड़े घबरा गए। परंतु हार नहीं मानी। कई राते फुटपाथ पे बिताई। ना खाने को मिला ना ठीक से सोने को उसके बाद भी जीवन की इस सच्चाई से लड़े और आज देश की शान है।जानकारी के अनुसार हैरी बचपन से ही एक पायलट (Pilot) बनना का सपना देखा करते थे। इसके लिए उन्होंने प्राइवेट पायलट लाइसेंस का एग्जाम साल 2017 में पास कर लिया था और जोहानसबर्ग में उसे लाइसेंस भी मिला।  उनके जीवन में ऐसा मोड़ भी आया, जब अपना खर्चा चलाने के लिए एक छोटी सी जूस की दुकान पर काम किया। कुछ लोग उन्हें अजीब नजर से देखा करते थे, पर उनपर कोई खास असर न हुआ। अब बिना रुके आगे बढ़ते गए। उंन्होने अपने सपनो को पूरा करने के लिए बहुत कठिन परिश्रम किया। विकट परिस्थितियों से भी हार नही मानी।  

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किस तरह किया अपना सपना पूरा

कुछ समय पश्चात उन्हें एविएशन एकेडमिक्स संस्थाओं में पार्ट टाइम की जॉब मिली। परंतु वहां भी उनके साथ पक्षपात हुआ। इसके बाद हेरी ने सोशल जस्टिस विभाग से अपनी आगे स्टडी को जारी रखने के लिए सहायता की मांग की। जिससे उनको एशियन अकैडमी को Join करने की सलाह दी गई और फिर हेरी ने राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एविएशन एंड टेक्नोलॉजी को Join किया।


जब हैरी अपने बुरे वक्त से गुजर रहे थे तब केरल सरकार उनके लिए भागवान स्वरूप आए और राज्य समाजिक न्याय डिपार्टमेंट की ओर से 23.24 लाख रुपए की स्कॉलरशिप दिलवाई थी। इस हेल्प के जरिये उनके सपनों को उड़ान मिली यही से उनका सफर शुरू हुआ।


यही से उनकी जिंदगी पलट दी और वह कमर्शियल पायलट बन कर देश के सामने आए लोगों की नफरत को उन्होंने मोहब्बत में बदल दिया। आज उनकी काबिलीयत पर पूरा देश सलाम कर रहा है। कही न कही उनके अभिभावक को अपने अंदर एक पछतावा होगा।


समय का फेरबदल

एक कहावत है कि किसी का समय एक जैसा नहीं होता इस लिए परिस्थिति से लड़ना है। उससे डरना नहीं है। कभी भी किसी की बात को लेकर अपने सपनो से पीछे नही हटना। अगर आपने जुनून और जसवा होगा तो आप हर सपने को पूरा करने में सफल होंगे। हैरी एडम किन्नर समाज के लिए एक गौरव है। हेरी ने पूरे देश का इतिहास बदल दिया।

आज वह एक पायलट (Pilot Adam Harry) बन कर हमारे लिए एक प्रेरणा का स्त्रोत बन गए है। एक छोटा बच्चा जब बोलना सीखता है, तो उसका पहला शब्द माँ होता है। कैसी रही होगी वो माँ, जिसने अपने ही अंश को दुनिया की ठोकर खाने के लिए छोड़ा होगा। लेकिन हैरी के बुलन्द होसलो ने उसको कामयाबी की सीढ़ी पर चढ़ा दिया।