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दूधमुहे बच्चे को गोद में लिए मेट्रो में ज़मीन पर बैठी महिला, IAS ने शेयर की वीडियो कहा ऐसी डिग्री किस काम की

दोस्तो जैसा कि सभी को मालूम है बदलते समय के साथ बहुत सी चीजों में बदलाब आया है बड़े बड़े शहरों में लोगो को जॉब या अन्य कामों के लिए रोजाना सफर करना पड़ता । गाड़ियों की वजह से सुबह और श्याम के समय सड़को पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा हो जाता है ऐसे में रोजाना सफर करने वालो की सहूलियत के लिए मेट्रो चलाई गई है मेट्रो से रोजाना लाखो लोग सफर करते है मेट्रो में इतनी भीड़ होती है कि हर किसी को सीट चाहिए सीट के मामले किसी को किसी से मतलब नही ।चाहे सामने गर्भवती महिला हो,छोटा बच्चा हो ,बुजुर्ग हो ,विकलांग हो उनके लिए कोई अपनी सीट नही छोड़ता ।आज हम आपको ऐसे ही एक मामले के बारे में बताने वाले हैं जिसके सामने आने के बाद लोगो की शिक्षा और डिग्रियों पर बात आगयी है .

हाल ही में दिल्ली मेट्रो से एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक महिला को मेट्रो में जमीन पर बैठे हुए देखा जा सकता है क्योंकि उस महिला के छोटा-सा बच्चा था। ऐसे में इस तस्वीर के वायरल होने के बाद लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी, जबकि आईएएस ऑफिसर ने कहा कि ऐसी डिग्री का क्या फायदा है।

बच्चे के साथ जमीन पर बैठी महिला

इन दिनों सोशल मीडिया पर मेट्रो में जमीन पर बैठी महिला और उसके बच्चे का फोटो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इंसानियता और मातृत्व को शर्मसार कर दिया है। दरअसल इस फोटो में अन्य महिलाएँ सीट पर बैठी हुई दिखाई दे रही हैं, जबकि वह महिला अपने बच्चे को गोद में लिए जमीन पर बैठी हुई है।मेट्रो में सफर कर किसी भी महिला को इस बात एहसास नहीं हुआ कि उस महिला के पास छोटा-सा बच्चा है और उसे सीट की जरूरत है, जबकि सीट पर बैठी ज्यादातर महिलाएँ खाली हाथ थी और अपने-अपने मोबाइल फोन में लगी हुई थी।

IAS ऑफिसर ने शेयर किया वीडियो

इस तस्वीर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पढ़े लिखे लोगों को व्यवहार को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है, जिसमें IAS ऑफिसर अवनीश शरण ने भी अपनी बात रखी। IAS ऑफिसर ने ट्वीटर पर इस घटना से जुड़ा एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, आकी डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, अगर वह आपके व्यवहार में न दिखे।

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी अलग-अलग राय सामने रखी, किसी ने कहा कि महिला जमीन पर बैठने में ज्यादा आरामदायक महसूस कर रही होगी। वहीं एक अन्य यूजर का कहना था कि 9 घंटे ऑफिस में काम करने के बाद 2 घंटे का लंबा सफर तय करने वाले लोग पहले अपने बारे में ही सोचेंगे।

वहीं कुछ लोगों ने महिला की वीडियो और तस्वीर क्लिक करने वाले व्यक्ति पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस तरह की वीडियो बनाने से अच्छा था कि वह व्यक्ति अपनी सीट महिला को दे देता, जिसके बाद ट्वीटर-ट्वीटर खेलने की जरूरत नहीं होती।

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