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इंदिरा गाँधी और तेजी बच्चन कभी दोस्ती में छिड़कते थे एक दुसरे पर जान, पर एक लालच से टूट गई दोस्ती

मित्रों अक्सर देखा जाता रहा है कि छोटी छोटा बातें अचानक बड़ी समस्या का रूप धारण कर लेती है, ऐसा कई लोगों के जीवन में होता आया है। कोई पल दोस्त है तो पल में दुश्मन, आज हम एक ऐसी ही घटना के संबंध में बात करने वाले है जिसमें दो दोस्तों के बीच दोस्ती खत्म हुई और दोनों की दोस्ती के बीच ऐसी दरार पड़ी की कभी न भर पाई। अब आप लोग सोच में अवश्य पड़ गये होगें कि आखिर ऐसा क्या हुआ होगा कि तेजी बच्चन और इंदिरा गांधी के बीच दरार पड़ गई। आइए जाने आखिर क्या है कारण।  

दरअसल आज हम जिस घटना के संबंध में बात कर रहे है वो साल 1968 के आस पास की है, जिसमें सदी के महा नायक अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन व इंदिरा गांधी के संबंध में है। आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन इंदिरा गांधी की बेहद ही करीबी दोस्त हुआ करती थी और ये अक्सर इनके घर जाया करती थी। हालांकि इंदिरा गांधी की एक बात से नाराज होकर तेजी बच्चन ने इनसे सारे नाते तोड़ लिए और इनकी दोस्ती पूरी तरह से खत्म हो गई। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या तक दोनों परिवारों के संबंध बहुत अच्छे थे। अमिताभ और राजीव गांधी के बीच भी काफी दोस्ती थी।

कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन 13 जनवरी 1968 की सुबह कड़ाके की सर्दी में पालम एयरपोर्ट पर अपने दोस्त की होने वाली पत्नी सोनिया गांधी को लेने पहुंचे थे। इस दिन सोनिया गांधी, राजीव की मंगेतर के रूप में भारत आई थीं। सोनिया को तेजी बच्चन ने अपने घर में ठहराया था और तेजी ने उनको भारतीय संस्कृति और तौर तरीकों के बारे में समझाया था। शादी के कुछ हफ्तों पहले ही सोनिया दिल्ली आ गई थीं। शादी से पहले बहू अपने ससुराल में नहीं रुक सकती थीं। इसी वजह से वे तेजी बच्चन के घर जाकर ठहरी थीं। इस दौरान तेजी ने उन्हें शादी की रस्मों और इंडियन कल्चर के बारे में जानकारी दी थी। यहां तक शादी की कुछ रस्मे में भी उनके घर पर ही हुई थीं।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि पत्रिका ‘सूर्या’ के अनुसार साल 1980 में इंदिरा ने तेजी बच्चन की जगह राज्यसभा सीट के लिए नरगिस को चुना था। ये बात तेजी बच्चन को बहुत बुरी लगी। यहां से ही इन दोनों परिवार के रास्ते अलग हो गए। उस दौरान इंदिरा गांधी ने अपने फैसले पर सफाई देते हुए ये कहा था कि नरगिस इस पद को किसी और की तुलना में अधिक डिजर्व करती हैं। संजय गांधी के निधन के बाद राजीव गांधी ने राजनीति में कदम रखा तो अमिताभ बच्चन को कांग्रेस में शामिल कर लिया। अभिनेता ने इलाहाबाद से चुनाव भी लड़ा और सांसद चुने गए। हालांकि बोफोर्स पर विवाद के बाद अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद से सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया। अमिताभ के पार्टी छोड़ने से राजीव गांधी को काफी नुकसान हुआ और इनकी पार्टी चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। वहीं तभी से इन दोनों परिवारों के बीच दूरी आ गई। पहले तेजी और इंदिरा, फिर राजीव और अमिताभ की दोस्ती टूट गई। इंदिरा गांधी पहले से ही जानती थी कि अमिताभ को राजनीति में लाना गलत साबित होगा। यहीं वजह थी कि इन्होंने राजीव गांधी को साफ कहा था कि अमिताभ बच्चन को राजनीति में नहीं लाया जाना चाहिए। लेकिन राजीव गाधी ने अपनी मां की बात को नहीं माना। मित्रों इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है?

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