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रेलवे ने वाराणसी को दी सौगात, रेलवे स्टेशन का नाम रखा संस्कृत में

हमने अक्सर देखा है कि रेलवे स्टेशन पर साइन बोर्ड या फिर रेलवे स्टेशन का नाम इंग्लिश, हिंदी और उर्दू में होता है। क्या आपने कभी किसी रेलवे स्टेशन का नाम संस्कृत में लिखा देखा है। अब वो दिन जा चुका है जब सिर्फ उर्दू, हिन्दी और इंग्लिश में ही रेलवे स्टेशन का नाम लिखा हो। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा कर दिखाया है। अब उत्तर प्रदेश के एक रेलवे स्टेशन का नाम संस्कृत में लिखा गया है।

काशी के लोगों के लिए एक नई सौगात

आपको बता दें कि पीएम मोदी के आगमन से पहले काशी के लोगों ने कुछ ऐसा काम किया है। जिसे देखकर पीएम मोदी के साथ साथ देश की सारी जनता, आज काशी वासियों की वाहवाही करने में लगी हैं। काशी के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक नया तोहफा दिया है। बीते बुधवार की शाम वाराणसी रेलवे स्टेशन को एक नई सौगात मिली है। सौगात मिलने का कारण भी नरेंद्र मोदी है। क्योंकि नरेंद्र मोदी उसी स्टेशन का दौरा करने वाले हैं।

स्टेशन का नाम मंडुवाडीह से बदल कर बनारस किया

यहां मंडुवाडीह स्टेशन को बनारस (Banaras Railway Station) नाम दिया गया है। दरअसल वहां के लोगों को इस रेलवे स्टेशन का नाम बोलने में काफी दिक्कतें आती थी। यही वजह है कि काशी के लोगों ने इस स्टेशन का नाम बदलकर अब बनारस कर दिया है। नए बोर्ड पर अब आपको हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और उर्दू इन चारों भाषा में बनारस लिखा दिखेगा। आज से उस रेलवे स्टेशन के टिकट पर भी बनारस लिखा होगा।

मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलना कोई संयोग नहीं है। क्योंकि वहां के लोग कई सालों से इस रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। काशी और मथुरा नाम से तो रेलवे स्टेशन था, परंतु बनारस नाम से नहीं था। यही वजह है कि वहां के लोगों ने सोचा कि क्यों न इस रेलवे स्टेशन का नाम बनारस कर दिया जाए।

बीते वर्ष केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी उत्तर प्रदेश के इस रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने की मंजूरी दे दी थी। इसके नाम को लेकर कागजी काम कई स्तरों पर पूरी की जा रही थी। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद इस रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर बनारस कर दिया गया है। आपको बता दें कि इस स्टेशन का कोड बीएसबीएस है।

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