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भीम कुण्ड का रहस्य, आज तक है एक पहेली

आखिर ऐसा क्या है भीम कुण्ड का रहस्य, जिसे आज तक वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाए ! कोई नहीं माप पाया इस जल कुण्ड की गहराई, बड़े बड़े गोताखोर भी नहीं ढूंड पाए इसकी गहराई का तल !

भारत का इतिहास बहुत ही रहस्यपूर्ण है , यहाँ अनेक ऐसे मंदिर, अनेक जगह और अनेक ऐसी चीज़े है जिनमें कोई न कोई ऐसा रहस्य छुपा हुआ है  जिन्हें आज तक वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाये है ! भारत ऐसे ही अनूठे और अनसुलझे रहस्यों के कारण विश्वभर में पसिद्ध है और उन्ही में से एक रहस्य है भीम कुण्ड का रहस्य, एक ऐसा कुण्ड जिसकी गहराई को आज तक कोई भी नही माप पाया है, बड़े – बड़े वैज्ञानिक भी इस रहस्य के आगे फेल हो गए ! तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्या  है इस रहस्यमई कुण्ड में जो अब तक सबके लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुया है !

Bheem Kund In MP Is Mysterious, Nobody Can Measure It's Depth - महाभारत काल  से जुड़ा है छतरपुर का रहस्यमयी कुंड, गहराई इतनी की वैज्ञानिकों के यंत्र भी  हुए फेल | Patrika News

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बचना गाँव में स्तिथ प्राचीन कुण्ड, जिसे भीम कुण्ड के नाम से जाना जाता है एक ऐसा रहस्यमयी कुण्ड है जिसकी गहराई का पता आज तक नही चल पाया है ! कई वैज्ञानिकों ने इसकी गहराई का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन हर वार सही को निराशा ही हाथ लगी ! भीमकुंड के चारो तरफ कठोर चट्टानों की गुफा बनी है ! ये स्थान साधना का एक केंद्र है ! प्राचीन समय से ही इस कुण्ड में बड़े से बड़े तपस्वी, साधु तपस्या करते आये है ! इस कुण्ड को लेकर लोगो की अलग – अलग मान्यताये है ! कुछ लोगो का मानना है कि भीम कुण्ड एक शांत ज्वाला मुखी है और कुछ लोगो के लिए तो ये स्थान घुमने फिरने का स्थल है, तो कुछ के लिए रिसर्च का केंद्र !

पौराणिक मान्यता के अनुसार भीम कुण्ड का रहस्य महाभारत काल से जुड़ा है जब पांडव अपने अज्ञात वास पर थे उस दौरान द्रोपदी की बहुत ज्यादा प्यास लगी, फिर सभी पांडव मिल कर जंगल में द्रोपदी के लिए पानी की तलाश करने लगे !लेकिन उन्हें कुछ समय के बाद पानी न मिलने के कारण द्रोपदी और सभी पांडवो की हालत खराब होने लगी ! ये देख कर भीम को बहुत गुस्सा आया और भीम ने गुस्से में जोर से अपनी गदा को ज़मीन पर दे मारा और यभी वहां से पानी निकलने लगा ! ये देख कर सभी पांडव ल्हुष हो गए और उन्होंने द्रोपदी को पानी पिलाया फिर सभी पांडवो ने अपनी प्यास बुझाई ! तभी से इस कुण्ड का नाम भीम कुण्ड पड़ गया !

पौराणिक कथा के अनुसार ही इस कुण्ड की एक और कथा भी प्रचलित है ! बताया जाता है कि इस कुण्ड को नील कुण्ड और नारद कुण्ड भी कहा जाता है ! इस कथा के अनुसार एक बार नारद मुनि भ्रमण यात्रा पर निकले, तभी उन्होंने देखा की एक महिला और पुरुष काफी घायल अवस्था में पड़े है ! नारद जी के पूछने पर उन्होंने बताया कि वो संगीत कला के राग रागिनी है ! उन्होंने बताया कि उन्हें ठीक करने का केवल एक ही उपाय है ! यदि संगीत कला में माहिर कोई कलाकार साम गान गाये तो वो दोनों अपनी पहली वाली अवस्था में वापिस आ जायेंगे ! ये सुनते ही नारद जी को प्रसन्नता हुयी की वो खुद उन्हें थी कर सकते है क्युकी नारद जी स्वंय इस कला में माहिर है ! जैसे ही नारद जी ने साम गान शुरू किया, घायल राग रागिनी ठीक होने लगे और अपनी पहले वाली अवस्था में आ गए ! नारद जी के गायन से सभी देवता मोहित हो गए और वुष्णु भगवान् तो इतने मोहित हो गए कि वो एक जल कुण्ड में परिवर्तित हो गए और इसका रंग नीला हो गया ! बस तभी से ये कुण्ड नील और नारद के नाम से जाना जाता है!

Bhimkund Mystery - भीमकुंड की कहानी, जहाँ पानी कम नहीं होता। - Gyan Kida

वैसे तो भीम कुण्ड का पानी नीले रंग का है लेकिन जैसे ही सूरज की किरने इस पानी में पड़ती है तो ये पानी और भी जयादा आकर्षक रूप ले लेता है ! इतना प्राचीन होने के बाद भी इस कुण्ड का पानी इतना ज्यादा साफ है कि इसके पानी की गहराई में पड़ी चीजो को भी आसानी से देखा जा सकता है ! ये कुण्ड न केवल अपने देश में मशहूर है बल्कि दुनिया भर में इस कुण्ड का रहस्य मशहूर है ! दुनिया के कई वैज्ञानिकों ने और गोताखोरों ने  इस कुण्ड की गहराई का पता लगाने की कोशिश की लेकिन कोई भी इसमें सफल नही हो पाया ! इसके बाद डिस्कवरी चैनल की एक टीम ने भी कई गोताखोरों के साथ इसकी गहराई का पता ल्लागाने की कोशिश की लेकिन वो भी इस काम में असफल रहे !

आमतौर पर जब भी कोई व्यक्ति पानी में डूब जाता है तो उसका मृत शरीर पानी की सतह पर तैरने लगता है ! लेकिन इस कुण्ड का सबसे बड़ा दुसरा रहस्य ये है कि जब भी कोई व्यक्ति इस कुण्ड में डूब जाता है तो उसका शरीर रहस्यमयी तरीके से डूब जाता है कि कभी भी मिल नहीं पाता और न पानी की सतह पर आता है !

इस जल कुण्ड की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि भविष्य में होने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा का संकेत इस जल कुण्ड से पता चल जाता है ! यहाँ पर रहने वाले लोगो का कहना है कि किसी भी प्राकृतिक खतरे का आभास उन्हें पहले से ही हो जाता है ! उन्होंने बताया की प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ आने से पहले ही इस जल कुण्ड का सतर बढ़ जाता है और इसके पानी में ऐसे कई संकेतो से पहले ही पता चल जाता है कि कोई बुरी घटना घटने वाली है  ! सुनामी आने पर इसका जल स्टर 15 फीट कट ऊपर उठ गया था   वहां के लोगो का कहना है कि भीम कुण्ड किसी भी परिस्तिथि में सुखा नहीं पड़ता ! इस कुण्ड का पानी कभी भी नहीं ख़तम होता और न ही कम होता है !

यहाँ तक की इस जल कुण्ड के स्त्रोत्र का भी अभी तक पता नहीं चल पाया है !जब प्रशासन ने एक कुण्ड के पानी को एक पम्प की सहायता से खाली करने की कोशिश की उसके बाबजूद भी इस जल कुण्ड के पानी का सतर कम नहीं हो पाया और न ही इसके तल का पता लगाया जा सका ! गोताखोरों के 80 फीट की गहराई तक जाने के बाद उन्हें केवल जल के तेज़ धाराए ही मिली है जो शायद किसी सागर से मिलती हो

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